ये सत्ता के गलियारे
खेल संभालकर प्यारे
पहले दिया सहारा
अब पहुँचाया कारा।


मुगल इतिहास में औरंगजेब ने एक नजीर पेश की थी। जिस जिस से उसे डर था, चुन-चुन कर उसे जेल में बन्द करवाया था। जिनमें उसका सगा बाप शाहजहॉं भी शामिल था। तो श्री मान राजा साहब आप किस खेत की मूली है। देखते नहीं तुम्हारे इस 2-जी के खेल ने सरकार को किस आफत में डाल दिया है और विपक्ष किस तरह मामूली से एक लाख छियत्तर हजार के घोटाले को पकड़ कर बैठ गया है। और किस तरह जे.वी.सी. की मॉंग पर अड़ा है। अब तुम्ही बताओ प्रिय राजा! यह सरकार तुम्हें दो साल तक सहारा देती रही और सहारा तो एक तरफ , तुम्हे तो चहेता राजा ही बनाकर रखा। अरे भले ही लोकतन्त्र क्यों न हो लेकिन इस लोकतन्त्र में कोई मन्त्री किसी राजा से कम थोड़े ही होता है। अब हमें बजट भी तो पास करवाना है सो विवश्तावश हमें यह कदम उठाना पड़ा है। लेकिन तुम किंचित मात्र भी चिंतित और विचिलित मत होना। इतिहास गवाह है कि इससे पूर्व भी कितने ही मन्त्री जेल गये हैं। उदाहरण के लिये सर्व श्री सुखराम जी भी तुम्हारी ही तरह दूरसंचार मन्त्री थे, गिरफतार हुऐ, जमानत से बाहर हुऐ, तेरह साल बाद जब उच्च न्यायलाय ने उन्हें दोषी पाया तो अन्होनें कहा था कि अभी उच्चतम् न्यायालय का द्वार बाकी है। शिब्बू सौरेन कत्ल के मामले में जेल गये, छूट कर आये तो , बड़े कोयला मन्त्री बने। लालू प्रसाद यादव 73 दिन तक जेल मे ंरहने के बाद रेलमन्त्री बने। इसी तरह सुश्री जयललिता भी जेल गईं और जब वे सत्ता र्में आइं तो उन्हें जेल भेजने वाले श्रीमान करूणानिधि जेल गये। तो भई! राजा जी! यह तुम्हारा जेल जाना कोई डिसक्वालीफिकेशन नही है। तुम निश्चिन्त रहो, बोलो कुछ नही, चुपचाप जेल जाओ और जमानत करवा कर बाहर आओ। देश में अच्छे धुरन्धर वकीलों की कमी नही है। जो स्याह को सफेद और सफेद को स्याह साबित कर सकते हैं तो फिर चिन्ता किस बात की।
यह थोड़ा सा गर्दिश का समय है, और मानस में तो तुलसी दास जी ने साफ साफ लिखा है ‘‘दिवस जात नहीं लागहिं बारा। रहिउ एक दिन अवधि अधारा’’ पता ही नही चला था कि किस तरह श्री राम के 13 बरस और 29 दिन योंहि बीत गये थे।


यह समय बड़ा तेजी से भागता है। थोड़े ही दिनों के बाद तुम बाहर आ जाओगे। इस घोटाले के केस में होना हवाना कुछ नही है और इस बात की पूरी संभावना है कि तुम दोबारा मन्त्री पद पा लोगे। जब उपरोक्त गिनवायें गये मंत्रियों का बाल भी बाका नही हुआ तो तुम्हारा ही क्यों होगा। हमारे इस लोकतन्त्र की परमपरा है कि यदि किसी घोटाले में पकडे़ भी जाओ तो बिलकुल भी मत घबराओ। यहॉं दागी मंत्रियों को केवल कष्ट होता है, कारावास नहीं।
अब सुन रहे हैं कि श्री कलमाड़ी जी की बारी है। अभी चन्द रोज पहले ही किसी टिप्पणी पर उन्होनें घूर कर ऑंखें दिखाई थीं अब पूरी सम्भावनायें है कि उनकी वही आंखे जेल का बड़ा फाटक भी निहारेंगी।


लिखते लिखते हमें थोड़ा ज्योतिष का ज्ञान भी हो गया है, हमें तो दोनो घोटालों में जो सम्भावना नजर आ रही है, वह है कि इन दोनो महानुभावों के आजू-बाजू वालों पर न्यायालय की गाज गिरेगी। ये निर्दोष मुस्कराते हुअे जेल के सींकचों से बाहर आयेंगे और फिर से राजनीतिक शतरंज के खेल में मस्त हो जायेंगें और सभी विरोधियों को मात देकर पुनः विजय रथ पर सवार दिखाई देंगे।



2 टिप्पणियाँ:

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हमराही